पड़ोस वाली दीदी का सेक्स ज्ञान – Pados Wali Didi Ke Sath Chudai Ki Kahani

Didi Ke Sath Sex Ki Kahani – दोस्तों आज की Hindi Sex story की कहानी मे हम आपके लिए Nisha Didi Sex Story In Hindi लेकर आये है Nisha Didi ke sath chudai ki kahani पढ़िए और एन्जॉय कीजिये|

पड़ोस वाली दीदी का सेक्स ज्ञान ( Hindi Sex Story )

पापा को किसी कारणवश  तुरन्त मामा जी के घर जाना पड़ा।
हमारी परीक्षा के कारण पापा ने कहा कि तुम
दोनों भाई घर पर ही रहकर पढ़ाई करो, Hum
मामा के घर से दो दिन बाद वापिस आ जायेंगे।
Hum दोनों भाई ऐसे नहीं थे कि अपने लिए
खाना बना सकें इसलिए माँ ने
कहा कि खाना बनाने के लिये पड़ोस में रहने
वाली निशा को बोल देती हूँ, वो आकर तुम
दोनों का खाना बना देगी। बस दो दिन की बात
है किसी तरह काम चला लो।
वो शनिवार का दिन था। सुबह सुबह माँ-
पापा मामा के घर चले गये और Hum दोनों भाई स्कूल
परीक्षा देने। दोपहर को जब Hum दोनों स्कूल से
वापस आये तो देखा कि निशा DIDI हमारे घर
आकर खाना बना चुकी हैं और Hum
दोनों भाइयों का इंतजार कर रही हैं।
उन्होंने हमें गर्म खाना खिलाया और शाम
को दुबारा आने को बोल कर अपने घर चली गईं।
Hum दोनों भाई भी खेलने चले गये। शाम को खेलकर
जब मैं निशा DIDI के घर गया तो उनकी माँ ने
Mujhe बहुत डाँट लगाई, बोली- तेरी माँ घर में
नहीं हैं और तूने सारा दिन खेलने में बिता Diya?
अगली परीक्षा की तैयारी भी नहीं की? अब आज
रात को निशा DIDI तेरे घर में ही रहेगी और
तेरी परीक्षा की तैयारी कराएगी। अगर इस बार
भी तूने लापरवाही कि तो Meri मार तो पक्की।
मैंने डरकर तुरंत हाँ कर दी।

Nisha Didi Ki Chudai Ki Hindi Kahani

रात को निशा DIDI अपने घर का काम निपटाकर
Mere घर आईं। उन्होंने प्रेम से खाना बनाकर Hum
दोनों भाइयों को खिलाया। पढ़ाने के समय
बिजली चली गई। निशा DIDI Hum
दोनों भाइयों को पढ़ाने के लिए छत पर ले गईं।
वहाँ करीब 11 बजे तक Humने उनसे पढ़ाई की, उसके
बाद Hum सब सोने लगे।
बिजली नहीं होने के कारण मैं नीचे घर से एक चादर
ले आया और उसी को छत पर बिछा कर Hum
दोनों भाई सो गये। mera भाई थका होने के कारण
लेटते ही सो गया। निशा DIDI की भी पलकें
भारी हो रही थीं। वे बात करते-करते Mere बराबर
में ही लेट गईं।
मैंने पूछा- DIDI, आपको अलग से चादर ला दूँ?
उन्होंने मना कर Diya, बोली- अभी तेरे पास
ही लेट जाती हूँ, थोड़ी देर बाद चली जाऊँगी।
Mere लिये उनको इतने करीब महसूस
करना पहली बार हो रहा था। इससे पहले कभी मैंने
इस बारे में सोचा भी नहीं था। उनका सामिप्य
Mujhe अच्छा लग रहा था। मैं उऩसे बात कर
रहा था लेकिन मादा स्पर्श से
प्रकृति की स्वाभाविक प्रेरणा Mere लंड पर असर
डालने लगी। थोड़ी देर में तनाव Meri निक्कर पर
भी महसूस होने लगा।
निशा DIDI ने भी इसे महसूस कर liya ।
वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर बोली- यह क्या है?
मैं कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था।
वो गुस्से में बोली- Mere बारे में ऐसी सोच रखता है?
तुझे पता है कि तू Mere से कितना छोटा है? तुझे शर्म
नहीं आती?
मैं डर से भागकर नीचे अपने कमरे में आ गया। पीछे
पीछे निशा DIDI भी नीचे आ गई तो Meri हालत
और खराब हो गई लेकिन निशा DIDI बोली-
इतना डरने की जरूरत नहीं है पर तू Mere बारे में
ऐसा सोचता है, तूने कभी बताया नहीं?
मैंने कहा- DIDI, मैं क्या सोचता हूँ, Mujhe खुद समझ में
नहीं आ रहा।
DIDI ने निक्कर के ऊपर से ही Mere लंड को स्पर्श
किया और बोली- मतलब तू नहीं सोचता, तेरा यह
पप्पू सोचता है।
मैं तो इतना डर चुका था कि जवाब देने की हिम्मत
ही नहीं जुटा पा रहा था। तभी DIDI बोली-
जरा दिखा अपना पप्पू ! देखूँ तो कैसा है?
डर के बावजूद Mujhe DIDI का स्पर्श
बड़ा सुखदायी लग रहा था, मन कर
रहा था वो वहाँ से हाथ ना हटाएँ।
DIDI ने Meri निक्कर को नीचे कर Diya,
mera ‘पप्पू’ तोप की तरह तना था, गोले छोड़ने
को तैयार।
DIDI ने बहुत ही प्यार से उसे अपने मुलायम
हाथों में ले liya और आगे-पीछे रगड़ना शुरू कर
Diya। Mere जीवन के उस असीम आनन्द
की कल्पना से आज भी सिहर उठता हूँ।
कुछ समय बाद ही Mere लंड में से क्रीम कलर
का पानी निकलने लगा। DIDI ने कपड़ा उठा कर
उसको साफ कर Diya। साफ करने के बाद DIDI ने
पूछा- कैसा लगा?
Mere पास शब्द नहीं थे।
Mere चेहरे पर खुशी की लहर और मुस्कुराहट देखकर
DIDI बोली- तेरा चेहरा बता रहा है कि तुझे बहुत
मजा आया?
मैंने हाँ में अपना सर हिला Diya।
थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत करके DIDI से कहा- एक
बार फिर से करो ना, बहुत अच्छा लग रहा था।
DIDI ने पूछा- तुझे पता है तू क्या कर रहा था?
Mujhe पता नहीं था।
DIDI ने Mere लंड को हाथ में पकड़ कर कहा-
अच्छा बता, यह पप्पू किस काम आता है?
मैंने कहा- सू सू करने के !
DIDI हँस पड़ी- अभी थोड़ी देर पहले जो इसमें से
निकला, वो क्या सू सू था?
मैंने कहा- नहीं, कुछ मलाई जैसा था।
“बस तो फिर यह समझ ले कि ये पप्पू सू सू करने के
अलावा भी और बहुत महत्वपूर्ण काम करता है।”
Meri आँखों में बस जिज्ञासा थी।
DIDI दो क्षण ठहरी, फिर बोली- तुझे ये सब कुछ
सीखना है क्या?
मैंने पूरी तरह से सम्मोहित था और इसी सम्मोहन
में मैंने कहा- हाँ !
DIDI बोली- मैं तुझे सब कुछ सिखा दूंगी, पर
वादा करना होगा कि किसी को नहीं बतायेगा।
अब तो उस दिव्य ज्ञान को प्राप्त करने के लिये मैं
कुछ भी करने के लिये तैयार था, मैंने वादा कर
liya किसी को कुछ नहीं बताऊँगा।
DIDI ने mera कान पकड़ा और कठोर स्वर में
चेताया- किसी को भी बताएगा तो तेरे माँ-
पापा से तेरी शिकायत कर दूंगी।
मैं डर और सम्मोहन, इन दो मनोभावों के वशीभूत
था, Mujhe पता भी नहीं चला कब बिजली आ गई थी।
DIDI ने पंखे की हवा में उड़ते अपने कुर्ते
का निचला सिरा पकड़ा और Meri आँखों में देखते हुए
उसे धीरे धीरे उठाने लगी।
Meri आँखें फैल गईं। ब्रा में ढके उनके सधे हुए स्तन Mere
सामने आ गए। पूर्ण विकसित युवती का वक्ष।
जिंदगी में पहली बार देख रहा था। mera ‘पप्पू’
आँधी सी उठाती उत्तेजना के सामने बेकाबू था।
DIDI ने Mere लंड की ओर संकेत करते हुए कहा- तेरे
पप्पू को तो तेरे से भी ज्यादा जल्दी है !?
Meri सूखी सी आवाज निकली- नहीं DIDI, आप
जैसा बोलोगी, मैं वैसा ही करूंगा। यह पप्पू
पता नहीं क्यों Mere काबू में नहीं है।
“आज यह तेरे नहीं, Mere काबू में है।” कहते हुए
DIDI ने अपने हाथ पीठ पीछे ले जाकर हुक खोल
दिए और कंधों से सरकाते हुए ब्रा उतार कर अलग
कर खाट पर रख दी।
Meri आँखों के सामने उनके दोनों स्तन पूरे गर्व से खड़े
थे, साँसों की गति पर ऊपर नीचे होते। Meri साँस
बहुत तेजी से चलने लगी। मैं खुद पर से
अपना नियन्त्रण खोकर पूरी तरह से DIDI के वश
में था।
DIDI ने Mujhe अपने पास खींचा और mera मुँह पकड़कर
अपने बाएँ वक्ष पर लगा Diya। उसकी भूरे रंग
की टोपी Mere मुँह में थी और Mujhe शहद जैसा आनन्द दे
रही थी।
उत्तेजनावश मैंने DIDI के वक्ष पर काट liya ।
DIDI के मुँह से निकल रही लयपूर्ण सी…सी…
की आवाज में ऊँची ‘आह’ का हस्तक्षेप हुआ।
उसने mera सिर थपथपाया और कहा- धीरे धीरे कर
न। अब तो ये दूध का गोदाम तेरा ही है।
जितना चाहे उतना पीना।
DIDI की बात Meri समझ में आ गई और मैंने फिर
धीरे धीरे प्यार से पीना शुरू कर Diya। बदल-
बदलकर कभी दायें को पीता, कभी बायें को !
DIDI को अपूर्व सुख मिल रहा था, उनका हाथ Mere
लंड पर प्यार से घूम रहा था।
रात अपने दूसरे पहर में प्रवेश कर चुकी थी और मैं
इस दुनिया से आनन्द के स्वर्ग में पहुँच
चुका था जहाँ निशा DIDI Mujhe साक्षात
रति की देवी नजर आ रही थी।
मैं बस उन दुग्धकलशों को पिए जा रहा था, Mujhe
इससे ज्यादा कुछ आता भी तो नहीं था।
DIDI ने mera प्रवेश अगली कक्षा में कराने
का फैसला किया, मुझसे बोली- सिर्फ दूध
ही पीता रहेगा या मलाई भी खायेगा?
मैंने कहा- आपका शिष्य हूँ। अभी तक आपने सिर्फ दूध
पीना ही तो सिखाया है।
DIDI उठ खड़ी हुई और अपनी सलवार
की डोरी झटके से खींच दी। कमर से
डोरी ढीली करके एक क्षण Meri आँखों में देखा और…
देखने के लिए एक बटा दस सेकंड चाहिए होते हैं।
सेकंड के उस दसवें हिस्से में उनकी गोरी कमर,
जांघों, घुटनों को प्रकट करती हुई सलवार के
एड़ियों के पास जमा हो जाने का दृश्य Meri आँखों में
रील की तरह दर्ज हो गया। अब DIDI, एक
पूरी औरत, अपनी पूर्ण प्राकृतिक नग्नावस्था में
Mere सामने थी।
मैं, जो अब तक दूध के कलशों पर ही सम्मोहित था,
बेवकूफ-सा उनकी टांगों के बीच के काले घास के
मैदान पर जाकर अटक गया। लग रहा था उसे
देखना वर्जित है पर न जाने किस प्रेरणा से
Meri निगाह वहीं बँध गई थी। कभी ऐसा दृश्य
देखा नहीं था। Mujhe वहाँ निहारना अच्छा लग
रहा था। mera ‘पप्पू’ भी विकराल हो गया था।
DIDI बोली- ज़न्नत का दरवाजा दिखाई देते
ही दूध का गोदाम छोड़ Diya? तुझे पता है कि इस
जन्नत में जाने का रास्ता दूध के गोदाम से होकर
ही जाता है?
मैंने पूछा- DIDI, वो कैसे?
DIDI हँसने लगी। वो Mere सामने बैठ गई। वो मुझसे
बड़ी थी, उन्हें Meri खाट के सामने जमीन पर बैठते
देख Mujhe बहुत संकोच हुआ। उन्होंने Mere लंड को अपने
नाजुक हाथों में पकड़कर प्यार से सहलाया। फिर
अपना मुँह आगे बढाया और उसके मुँह पर “पुच्च…”
एक चुम्मी दे दी।
Mujhe नहीं मालूम था इसे चूमा भी जाता है, पर
वो Meri गुरू थी, उन्होंने मुझसे पूछा- कैसा लगा?
“बहुत अच्छा !” उन्होंने उसे अपने मुँह में खींच
liya और लालीपोप की तरह चूसने लगी।
यह Mere लिये सर्वथा नया अनुभव था। मैंने कुछ देर
पहले ही प्राप्त हुए अनुभव के आधार पर DIDI के
वक्षों को सहलाना शुरू कर Diya।
थोड़ी देर बाद DIDI फर्श से उठी और Mujhe बिस्तर
पर लिटा Diya। उसके बाद घूमी और Mere ऊपर खुद
इस तरह लेट गई कि mera लंड पूरी उनके मुँह
की तरफ आ गया और
उनकी दोनों टांगों का संधिस्थल Mere मुंह की तरफ।
उन्होंने mera लंड फिर से मुंह में उठाया और पहले
की भाँति चूसना शुरू कर Diya। साथ
ही अपनी टांगों के बीच की दरार को Mere मुँह के
ऊपर रगड़ने लगी। थोड़ी देर तक अजीब लगने के
बाद Mujhe इसमें भी आनन्द आने लगा। मैंने खुद
ही अपना मुँह खोल Diya और उनकी योनि के
दोनों होठों को चूसना शुरू कर Diya।
काफी देर तक Hum दोनों इस अवस्था का आनन्द लेते
रहे। फिर अचानक Mere लंड से वो ही पानी निकलने
लगा जो करीब एक घंटा पहले निकला था। मैंने
महसूस किया कि DIDI की योनि से
भी हल्की हल्की बारिश Mere मुँह पर हो रही है
जिसे चाटने पर कसैला नमकीन स्वाद महसूस हुआ।
DIDI ने पूछा- कैसी लगी Meri मलाई?
अब Mujhe समझ में आया थोड़ी देर पहले DIDI किस
मलाई की बात कर रही थी। मैंने कहा, “बहुत
अच्छी, बहुत मजा आया DIDI।”
मैं दो बार स्खलित हो चुका था। पहली बार
DIDI के हाथों में और दूसरी बाद DIDI के मुँह में।
मैं खुद को आनन्द की पराकाष्ठा पर महसूस कर
रहा था।
परन्तु दोस्तो, अभी तो असली आनन्द बाकी था।
DIDI ने Meri तंद्रा भंग करते हुए फिर पूछा- इससे
भी ज्यादा मजा चाहिए?
अब Mere चौंकने का समय था, मैंने कहा- DIDI, मैंने
इतना ज्यादा मजा जीवन में कभी नहीं पाया।
ऐसा लग रहा है कि मैं जन्नत में हूँ। क्या इससे
भी अधिक मजा मिल सकता है?
DIDI बोली- अभी तूने खाली जन्नत
का दरवाजा देखा है, जन्नत के अंदर
तो गया ही नहीं।
इतना बोलकर DIDI ने Mere पूरे बदन को नीचे से
उपर तक चाटना शुरू कर Diya, यह Mere लिये
अनोखी बात थी। मैं भी प्रत्युत्तर में
वैसा ही करते हुए DIDI का ऋण चुकाने
को प्रयत्नशील था।
करीब पन्द्रह मिनट तक Hum दोनों एक दूसरे के
बदन को इस प्रकार चाटते रहे और पसीने से
तरबतर नमकीन स्वाद का आनन्द लेते रहे।
मैंने महसूस किया कि mera लंड फिर से करवट लेने
लगा है और एक नई पारी खेलने के लिये तैयार है।
अपने पहले दोनों स्खलन के अनुभवों को देखते हुए Mujhe
इस बार कुछ नया होने की उम्मीद थी। mera लंड
उठकर अपने गुरू यानि Meri DIDI को सलामी देने
लगा और उनकी नाभि से टकराने लगा।
DIDI ने Mujhe छेड़ते हुए कहा- तेरे पप्पू को चैन नहीं है
क्या? दो बार मैं इसको मैदान में हरा चुकी हूँ, फिर
से कुश्ती करना चाहता है? मैंने कहा- DIDI, इस
कुश्ती में इतना मजा आ रहा है कि बार-बार हारने
का दिल कर रहा है।
“यही तो नए पहलवान की खूबी है। मैंने ऐसे
ही थोड़े इसे चुना है।” DIDI ने कहा।
उन्होंने दो बार उस ‘चेले’ को ठुकठुकाकर
उसकी सलामी स्वीकार की और पूछा- तैयार है
ना?
“हाँ DIDI !” मैंने उत्साह से कहा।
DIDI ने एक बार फिर से mera लंड अपने मुलायम
हाथों में ले liya । लंड की सख्ती और
विकरालता देखकर बोली- लगता है, इस बार तू Mujhe
हराने के मूड में है।
और वो Mujhe नीचे लिटा कर Mere टांगों के दोनों ओर
अपनी टांगें करके Mere ऊपर बैठ गई। मैं उत्सुक शिष्य
की तरह उनकी हर क्रिया देख रहा था और
उसका आनन्द ले रहा था। Mujhe आश्चर्य में डालते हुए
DIDI ने अपनी टांगों के बीच की दरार को Mere
लंड पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया। और
Mujhe लगा कि mera लंड ही गायब हो गया। Mere पेड़ू
की सतह उसकी पेड़ू की सतह से ऐसे मिली हुई
थी जैसे वहाँ कभी कुछ था ही नहीं।
कहाँ चला गया?
DIDI Mere ऊपर बैठ कर हल्के-हल्के आगे-पीछे हिलने
लगी, बोली- अब बताओ, कैसा लग रहा है। पहले से
ज्यादा मजा आ रहा है कि नहीं?
सुखद एहसास से mera कंठ गदगद हो रहा था।
योनि के अन्दर लंड के रगड़ खाने का आनन्द
तो पिछले दोनों बार के आनन्द से बहुत ही अलग और
उत्तेजक था। सचमुच यही जन्नत है। ऐसा लग
रहा था जैसे अब तक मैं कहीं रास्ते में था और अब
मंजिल पर पहुँच गया हूँ।
DIDI बोली- अब तक जो जन्नत तुझे बाहर से
दिखाई दे रहा था, अब तू उस जन्नत के अन्दर
प्रवेश कर गया है।
मैंने भी DIDI को खुशी देने के लिए नीचे लेटे लेटे
ही उनके दोनों वक्षों को सहलाना शुरू कर Diya।
नशे में Meri आँखें मुंद गईं। वो अपना काम करने में
व्यस्त थी और मैं अपना।
अचानक DIDI की हरकतें तेज हो गईं। अपने पेड़ू
को मुझ पर जोर से मसलती हुई मुँह से अजीब-
सी मोटी आवाज में ‘आह…..आह…….’ निकालने
लगी।
मैंने घबराकर पूछा- क्या हुआ?
DIDI ने झुककर Mujhe चूम liya ।
Mujhe इत्मीनान हुआ, कुछ गड़बड़ नहीं है। शायद
सम्पूर्ण आनन्द की प्राप्ति होने वाली है।
DIDI ने कहा- mera तो हो गया। अब हिम्मत
नहीं है।
लेकिन Mujhe मंजिल नहीं मिली थी। मैं कमर जोर जोर
से उचकाकर उसे पा लेने के लिए बेचैन था।
DIDI ने कहा- तेरा दो बार हो चुका है ना।
इसलिए थोड़ा समय लगेगा।
वो Mere ऊपर से उतर गई और हाथ से mera लंड
पकड़़कर तेजी से आगे पीछे करके सहलाने लगी।
मैंने कहा- DIDI, ऐसे वो मजा नहीं आ
रहा जो जन्नत के अन्दर आ रहा था।
DIDI फिर से Mere ऊपर बैठ गई और दोबारा से Mere
लंड को अपनी जन्नत में धारण कर liya । अब
फिर से Mujhe वही रगड़ का आनन्द मिलने लगा। फिर
से जन्नत का मजा मिलने लगा। पुन: मैं फिर से
DIDI के वक्षों को सहलाने लगा।
DIDI ने Meri तरफ देखा और बोली- इस बार
की कुश्ती में तूने Mujhe हरा Diya। आखिर तूने
बदला ले ही liya ।
कुछ देर बाद Mere लंड से तेजी से स्खलन होने लगा।
DIDI भी आह…….. आह…….. करती फिर स्खलित
होने लगी। Hum दोनों एक साथ झड गये, और
सम्पूर्ण आनन्द की प्राप्ति हुई।

दोस्तों आपको पड़ोस वाली दीदी का सेक्स ज्ञान – Pados Wali Didi Ke Sath Sex Ki Ek Jabardast Kahani पसंद आई तो इस कहानी को अपने ऐसे दोस्त के साथ शेयर जरुर करे जो Didi Sex Ki Kahani पढने का शौंक रखता हो और दोस्तों इस hindi Sex Stories website पर हम डेली New Hindi Sex Story अपडेट करते रहते है

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